योगीराज भरत भूषण भारतेंदु जी की बांसुरी की धुन से गूंज उठा गुजरात के कच्छ का अहिंसा धाम.

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गुजरात (कच्छ) एक अभूतपूर्व,आध्यात्मिक और पर्यावरणीय चेतना से परिपूर्ण भव्य कार्यक्रम का आयोजन भगवान महावीर पशुरक्षा केंद्र, एंकर वाला अहिंसा धाम, मूंदड़ा (कच्छ, गुजरात) में किया गया। इस पुण्य अवसर पर योगीराज स्वामी भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज — संस्थापक श्री हरि नारायण सेवा संस्थान, पालघर (महाराष्ट्र), अखिल भारतीय जैन दिवाकर मंच (नई दिल्ली) के संत प्रकोष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा भाजपा आध्यात्मिक आघाड़ी योग प्रमुख (महाराष्ट्र प्रदेश) ने अपने आध्यात्मिक संगीत “बांसुरी की धुन” से समस्त धाम को ऊर्जा से किया ओतप्रोत, शुरुआत में नवकार महामंत्र,भगवान श्री कृष्ण धुन,और भगवान श्रीराम भजन से पशुपक्षी भक्त हुए मंत्रमुग्ध।
कार्यक्रम का आयोजन उस संस्थान में हुआ जो पिछले 33 वर्षों से जीवदया, पर्यावरण संरक्षण और पशुसेवा में सतत कार्यरत है। यह केंद्र भारत का अद्वितीय और विश्वस्तरीय प्राणी कल्याण स्थल है जहाँ:अत्याधुनिक पशु चिकित्सालय,
सैकड़ों एकड़ में फैला नंदनवन,लाखों पेड़,विशाल बीज बैंक,विशाल नंदीसरोवर,पर्यावरणीय नर्सरी,तथा हरित पर्यटन स्थल के रूप में अद्वितीय पहचान है। यह तीर्थस्थल न केवल प्राणियों की सेवा का केंद्र है, बल्कि हर दिन देश-विदेश से आने वाले हज़ारों पर्यटकों को प्रकृति, करुणा और सनातन मूल्यों से जोड़ता है।

👥 प्रमुख उपस्थिति और गरिमामयी सहभागिता 👥

संस्थान अध्यक्ष: श्री हरेशभाई वोरा ट्रस्टी श्री महेंद्र संगोई आदि ने संतों और अतिथियों का स्वागत सम्मान किया
सागर सावला, एडवोकेट राजेश गुप्ता, केशुभाई केडिया, अरुणभाई ओझा, योगेंद्रभाई जयपुरिया, बाबूभाई गोटी, विमल जी
रामाचार्य जी महाराज (विश्नोई समाज),प्रेमजीभाई, निलेशभाई छेड़ा, कमलभाई, नरेशभाई, जिग्ना बेन (जनमंगल सेवा ट्रस्ट, शंखेश्वर), निरूपा बेन, संतोष जी बेन, विजय लाला, कृष्णा बेन, माधवदास महाराज, डॉ. निलेश पाटिल, भरत परिहार, आनंद जी आनंद आदि।
योगीराज की बांसुरी — शांति, करुणा और ऊर्जा का संदेश
कार्यक्रम के दौरान योगीराज स्वामी भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज ने “हर सांस बांसुरी, हर स्पंदन करुणा” का संदेश देते हुए कहा:
“जहाँ बांसुरी की धुन होगी, वहाँ हिंसा नहीं होगी। जहाँ प्रेम का संगीत होगा, वहाँ मनुष्यता बचेगी।”
उन्होंने बांसुरी को “जीवदया का प्रतीक” बताते हुए इस धाम को भारत के लिए “प्राकृतिक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय” की संज्ञा दी। बहुत से लोगों को अहिंसा अवॉर्ड से भी नवाजा गया, कार्यक्रम का संचालन अमृत भाई ने किया।

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