पालघर पीठाधीश्वर योगीराज श्री भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज का भव्य स्वागत, बांसुरी वादन से मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु

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महाराष्ट्र ( अहिल्यानगर ) – 
श्री क्षेत्र राजापूर, गुंजाळवाडी, तहसील संगमनेर, जिला अहिल्यानगर में आयोजित विश्व गौरव विभूषित परम पूज्य स्वामी श्री गगनगिरी महाराज अखंड हरिनाम सप्ताह सोहळा 2026 के 8 जून से 15 जून के पावन अवसर पर पालघर पीठाधीश्वर ब्रह्मर्षि योगीराज श्री भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज का श्रद्धाभाव से भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित संत-महात्माओं, समाजसेवियों एवं हजारों श्रद्धालुओं ने योगीराज जी का अभिनंदन करते हुए उनके द्वारा संचालित “अपनी संस्कृति अपना संस्कार” जनजागरण अभियान तथा संपूर्ण महाराष्ट्र में चल रहे 100 दिवसीय योग महोत्सव एवं जनसंपर्क यात्रा की सराहना की।
कार्यक्रम में योगीराज श्री भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज ने अपने दिव्य बांसुरी वादन से वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। विशेष रूप से उनके द्वारा प्रस्तुत प्रसिद्ध मराठी भजन “दर्शन दे रे दे रे भगवंता” ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर एवं मंत्रमुग्ध कर दिया। भजन की मधुर स्वर लहरियों के साथ श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए तथा संपूर्ण परिसर हरिनाम संकीर्तन और आध्यात्मिक आनंद से गूंज उठा।
अपने संबोधन में योगीराज जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कार, योग, अध्यात्म एवं मानव सेवा ही राष्ट्र निर्माण की सशक्त आधारशिला हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी जड़ों, परंपराओं एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का आह्वान किया तथा कहा कि “संस्कृति बचेगी तो संस्कार बचेंगे, संस्कार बचेंगे तो राष्ट्र सशक्त बनेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि पालघर पीठ एवं श्री हरि नारायण सेवा संस्थान, मुंबई के माध्यम से महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में योग, संगीत, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, गौसेवा एवं सामाजिक जागरूकता के विविध कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में चल रहा 100 दिवसीय योग महोत्सव जन-जन तक स्वास्थ्य, सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना का संदेश पहुंचा रहा है।
कार्यक्रम के आयोजकों ने योगीराज जी के योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्हें सनातन संस्कृति, योग एवं भारतीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार का अग्रदूत बताया तथा भविष्य में भी उनके मार्गदर्शन की अपेक्षा व्यक्त की।
अंत में योगीराज जी ने सभी आयोजकों, संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए विश्व शांति, राष्ट्र कल्याण एवं मानवता के मंगल की प्रार्थना की।

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