उत्तर प्रदेश ( वाराणसी ) – श्री हरि नारायण आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य आदरणीय श्री लल्लन पांडेय जी से श्री हरि नारायण सेवा संस्थान, मुंबई के संस्थापक एवं पालघर पीठाधीश्वर ब्रह्मर्षि योगीराज श्री भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज ने स्नेहपूर्ण मुलाकात की। इस अवसर पर संस्कृत महाविद्यालय के आधुनिकीकरण, विस्तारीकरण एवं इसे विश्वस्तरीय स्वरूप देने पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में यह विचार व्यक्त किया गया कि वर्तमान समय में संस्कृत शिक्षा को केवल पारंपरिक अध्ययन तक सीमित न रखते हुए योग, आयुर्वेद, आधुनिक तकनीक, डिजिटल शिक्षा एवं वैश्विक संवाद से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। दोनों विद्वानों ने इस दिशा में डिजिटल गुरुकुल, अंतरराष्ट्रीय कोर्स, संस्कृति एवं संस्कार प्रशिक्षण केंद्र तथा सनातन रिसर्च सेंटर की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति व्यक्त की।
योगीराज श्री भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज ने कहा कि “संस्कृत केवल भाषा नहीं बल्कि भारत की आत्मा है। यदि इसे आधुनिक संसाधनों से जोड़ा जाए तो यह विश्व मानवता को जीवन का संतुलित मार्ग दिखा सकती है।
इस बैठक को संस्कृत शिक्षा के नवजागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शीघ्र ही महाविद्यालय के विकास हेतु चरणबद्ध कार्ययोजना लागू की जाएगी।
