सरकार के फैसले से पुरानी और जर्जर इमारतों के पुनर्विकास की उम्मीद: भवानजी

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महाराष्ट्र ( मुंबई ) मुंबई नेशनल वेलफेयर फाउंडेशन संस्था के अध्यक्ष और मुंबई के पूर्व उप महापौर बाबुभाई भवानजी ने मुंबई की पुरानी इमारतों के पुनर्विकास को लेकर कहा है कि हाईकोर्ट के नए फैसले से पुरानी इमारतों के पुनर्विकास की नई उम्मीद जागी है। इस संबंध में जानकारी पहुंचाने के लिए आयोजित सभा में भाजपा के वरिष्ठ विधायक कालीदास कोलंबकर, आर पी आई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजेंद्र गवई शिवसेना की विधायका मनीषा कायंदे,भाजपा के पूर्व विधायक और महाडा के पूर्व अध्यक्ष मधु चौहान , वरिष्ठ एडवोकेट सुरेंद्र मिश्र, एड. दुष्यंत कुमार, एड. विनोद तलरेजा, एड. राजेश देढ़िया,एड. श्री प्रकाश जगताबजी, समाज सेवक श्री राजेंद्र मेहता इन सभी ने करीब पांच घंटे तक उपस्थित भाड़ेकरू को जानकारी दी और उनके प्रश्नों के उत्तर देकर मार्ग दर्शन किया। सरकार का धोरण समझाते हुए आरजू संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र मेहता ने कार्यालय मुहैया करवाया जिसका पता: रत्नमणि टावर 3 फ्लोर (आरजू ) मुंबई मराठी ग्रंथ संग्रहालय मार्ग दादर पूर्व है। यहां दोपहर 2 से 7 बजे तक, संपर्के करें :राजेंद्र पालव सर 9930959398.

इस दौरान मार्गदर्शन देते हुए विधायक कालिदास कोलंबकर ने कहा कि मुंबई में पुनर्विकास का इंतज़ार कर रही पुरानी और जर्जर इमारतों में रहने वाले हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिली है। वर्षों से रुकी हुई पुनर्विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और खतरनाक इमारतों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित आवास मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

विधायक मनीषा कायंदे ने कहा कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की सुरक्षा से समझौता करते हुए जर्जर इमारतों को बार-बार समय बढ़ाना उचित नहीं है। ऐसी इमारतों का पुनर्विकास नियोजित और समयबद्ध तरीके से पूरा होना चाहिए। साथ ही, कुछ लोगों की अनावश्यक आपत्तियों के कारण अधिकांश निवासियों के हित में चल रही पुनर्विकास परियोजनाओं को रोका नहीं जाना चाहिए।

डॉ. राजेन्द्र गवई ने कहा कि इस फैसले का सबसे अधिक लाभ दक्षिण और मध्य मुंबई के गिरगांव, भुलेश्वर, मस्जिद, परेल, लालबाग, दादर, ग्रांट रोड, ताड़देव, कालबादेवी, डोंगरी, नागपाड़ा, भायखला और चिरा बाज़ार जैसे क्षेत्रों की पुरानी सेस (Cess) इमारतों को मिलेगा। इन इलाकों के हजारों परिवार लंबे समय से पुनर्विकास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

संस्था के ट्रस्टी राजेंद्र मेहता ने कहा कि इनमें से कई सेस इमारतें 70–80 वर्ष से भी अधिक पुरानी हैं। सरकार ने इनमें से अनेक इमारतों को खतरनाक घोषित कर रखा है। लगभग 1,000 से अधिक इमारतें अत्यंत जर्जर स्थिति में हैं, जहाँ छतों से पानी टपकना, दीवारों में दरारें पड़ना और इमारत गिरने का खतरा आम बात हो गई है।

एडवोकेट सुरेंद्र मिश्रा ने कहा कि इस फैसले से नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुनर्विकास कार्यों में तेजी आएगी। कानूनी बाधाएँ कम होंगी और पुराने इलाकों का आधुनिक एवं सुरक्षित रूप में विकास संभव होगा। एडवोकेट दुष्यंत कुमार ने कहा की मुंबई की 13,000 से अधिक सेस इमारतों को लाभ मिलेगा।

लगभग 2 लाख निवासियों को राहत मिलेगी।पुरानी इमारतों के पुनर्विकास के लिए इस ऐतिहासिक फैसले से कानूनी अनिश्चितता और बाधाएँ कम होंगी।

एडवोकेट विनोद तलरेजा ने कहा कि वर्षों से रुकी हुई पुनर्विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी। जर्जर और खतरनाक इमारतों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित आवास मिलने की उम्मीद बढ़ेगी। एडवोकेट राजेश देढ़िया ने कहा कि दक्षिण और मध्य मुंबई के शहरी विकास को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

अंत में बाबूभाई भवानजी ने कहा कि लैंड लॉर्ड की मनमानी के सामने मुंबई के तमाम भाड़ेकरू एक होकर संगठित हो तभी काम बनेगा।सरकार भी आपके साथ है।

सभा का आयोजन राजेंद्र पालव, मिलन सारंग, शिरीष परब, महेश सुर्वे ओर कार्यालय मंत्री परवीन सावंत ने किया था।

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