परिवार से मिला सम्मान सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सम्मान – रविनंदन सिंह

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उत्तर प्रदेश ( प्रयागराज )  सबसे बड़ा सम्मान है घर परिवार के लोगों द्वारा दिया गया सम्मान । ऐसा ही अवसर आया जब शहर के अपने समानधर्मा रचनाकारों का स्नेह प्राप्त हुआ। बाहर सम्मानित होना आसान है किंतु अपने परिवार में महत्त्व मिलना बहुत दुर्लभ है*। उपरोक्त उद्गार सुप्रसिद्ध साहित्यकार रविनंदन सिंह जी ने उस समय व्यक्त किया जब उनके आवास पर आयोजित साहित्यकार सत्कार आपके द्वार योजना में इनको साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज द्वारा *साहित्य रत्न सम्मान* प्रदान किया गया। श्री सिंह ने कहा कि बाहर मुझे भी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं ने कई सम्मान दिए हैं, जिसमें हिंदी संस्थान के तीन सम्मान – आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान, डॉ धीरेन्द्र वर्मा सम्मान तथा श्रीनरेश मेहता सम्मान के अतिरिक्त उप्र सरकार का अमृत महोत्सव सम्मान, निराला संस्थान डलमऊ का निराला सम्मान, संचेतना का सर्वेश्वर दयाल सक्सेना सम्मान, समन्वय का फादर कामिल बुल्के सम्मान, हिंदी साहित्य सम्मेलन का सम्मेलन सम्मान, वाराणसी साहित्यकार संघ का सेवक स्मृति सम्मान के साथ ही लखनऊ, रायबरेली, उदयपुर, जमशेदपुर, इंदौर, कोलकाता में भी सम्मानित हुआ, किंतु आज मिले साहित्य रत्न सम्मान की बात अलग है। यह पहला सम्मान है जो मेरे घर आकर यह प्रदान किया गया, इसलिए यह मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण सम्मान है।

विशिष्ट अतिथि डॉ शंभुनाथ त्रिपाठी अंशुल ने कहा कि किसी भी युग में धनवान नहीं पूजे जाते अपितु विद्वान सभी युगों पूज्यनीय रहा है। डॉ अंशुल ने इस योजना को एक बड़ी साहित्यिक उपलब्धि बताया।

मुख्य अतिथि डॉ बालकृष्ण पांडेय ने अपने संवोधन में कई संस्मरण सुनाते हुए कहा कि इनकी साहित्य साधना को और पहले ही सम्मानित किया जाना चाहिए था लेकिन हम लोग देर आए दुरुस्त आए।

साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज के तत्वावधान में शहर के अनेक रचनाकार रविनंदन सिंह के घर आए और माला, शाल, प्रतीक चिह्न, अभिनन्दन पत्र व साहित्य देकर सम्मानित किया। इस आयोजन के सूत्रधार भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय के प्रयास को सबने सराहा । साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज के सभी सम्मानित पदाधिकारियों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समारोह की अध्यक्षता कर रहे पंडित शिवराम उपाध्याय मुकुल मतवाला, ने कहा कि आज प्रयागराज में आयोजित इस समारोह ने पुनः एक मील का पत्थर स्थापित किया । श्रीमती पारुल सिंह राठौर की सुमधुर सरस्वती वंदना से शुरू आयोजन में डॉ बालकृष्ण पांडेय, डॉ शंभुनाथ त्रिपाठी ’अंशुल’, डॉ योगेन्द्र कुमार मिश्रा विश्वबंधु,डॉ रामलखन चौरसिया वागीश , डॉ वीरेंद्र तिवारी, सुनील दानिश, विवेक सत्यांशु, शंभुनाथ श्रीवास्तव, मंजू पाण्डेय महक जौनपुरी , रवीन्द्र कुशवाहा, शरतचंद्र श्रीवास्तव, राकेश मालवीय ’मुस्कान, डॉ. पारुल सिंह राठौर, दयाशंकर प्रसाद आदि ने अपनी काव्यमयी प्रस्तुति से आयोजन में चार चांद लगा दिया ।

अंत में रविनंदन सिंह ने अपने मुक्तक से सभी को आभार व्यक्त किया । संचालन डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय ने तथा स्वागत डॉ रामलखन चौरसिया ने किया।

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