हिंदीभाषी समाज के बीच जनाधार बढ़ाने की कोशिश में शिंदे सेना
बाबूभाई भवानजी को गुजराती विभाग की जिम्मेदारी, आनंद दुबे के शामिल होने से पार्टी को मिलेगी नई राजनीतिक मजबूती
महाराष्ट्र ( मुंबई ) महाराष्ट्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिशों के बीच एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने मुंबई में गुजराती और हिंदीभाषी समुदायों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया है। पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी को पार्टी के गुजराती विभाग की जिम्मेदारी सौंपने और पूर्व में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता रहे आनंद दुबे के पार्टी में शामिल होने को इसी रणनीति के महत्वपूर्ण कदमों के रूप में देखा जा रहा है।
बाबूभाई भवानजी मुंबई की राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वे बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के उपमहापौर रह चुके हैं और चार बार नगरसेवक के रूप में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस, युवक कांग्रेस, एनएसयूआई और कांग्रेस सेवादल में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। इसके अलावा, वे भारतीय जनता पार्टी के मुंबई हॉकर्स प्रकोष्ठ के अध्यक्ष तथा गुजराती और व्यापार प्रकोष्ठों में भी पदाधिकारी रह चुके हैं।
स्वतंत्रता सेनानी दिवंगत रावजी भाई छेड़ा के पुत्र भवानजी की पहचान एक सामाजिक कार्यकर्ता और श्रमिकों के मुद्दों से जुड़े नेता के रूप में रही है। वे भ्रष्टाचार विरोधी गतिविधियों और नशामुक्ति अभियान सहित विभिन्न सामाजिक पहलों से भी जुड़े रहे हैं। अपने राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने अलग-अलग दलों के वरिष्ठ नेताओं के साथ काम किया है।
भवानजी ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व और विकास संबंधी दृष्टिकोण से प्रभावित होकर शिवसेना में शामिल होने की बात कही है। पार्टी में उन्हें गुजराती विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उनके राजनीतिक अनुभव और गुजराती समाज के बीच संपर्क को मुंबई में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गुजराती और हिंदीभाषी समाज पर विशेष ध्यान
मुंबई की राजनीति में गुजराती, हिंदीभाषी और उत्तर भारतीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भाजपा को इन समुदायों के बीच लंबे समय से राजनीतिक समर्थन मिलता रहा है। ऐसे में शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ओर से इन वर्गों के बीच संगठनात्मक संपर्क बढ़ाने की पहल को मुंबई में अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भवानजी ने दावा किया कि गुजराती व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लोगों में सरकारी कामकाज, कथित भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर असंतोष है। उनके मुताबिक, आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों में काम कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और कई लोगों को लगता है कि उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मुंबई में पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए गुजराती, व्यापारी और उत्तर भारतीय समाज के साथ निरंतर संवाद स्थापित करना जरूरी है। उनके अनुसार, स्थानीय नागरिकों की समस्याओं को समझना और उनका समाधान कराने की दिशा में काम करना संगठन के विस्तार के लिए अहम होगा।
आनंद दुबे की एंट्री भी अहम
आनंद दुबे के शिवसेना में शामिल होने को हिंदीभाषी और उत्तर भारतीय समुदायों के बीच पार्टी का संपर्क बढ़ाने के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से, भवानजी का गुजराती समाज में अनुभव और दुबे की हिंदीभाषी समुदाय के बीच राजनीतिक सक्रियता पार्टी को विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने में मदद कर सकती है।
मुंबई और ठाणे में अपनी संगठनात्मक स्थिति मजबूत करने के लिए शिवसेना को स्थानीय मुद्दों, नागरिक सुविधाओं, व्यापारियों की समस्याओं और आम लोगों की शिकायतों पर लगातार काम करना होगा। नए पदाधिकारियों की नियुक्तियों का वास्तविक प्रभाव पार्टी की जमीनी सक्रियता और नागरिकों के साथ उसके संवाद पर निर्भर करेगा।
आगामी लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मुंबई में विभिन्न समुदायों के बीच राजनीतिक संपर्क और संगठनात्मक विस्तार सभी प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे। बाबूभाई भवानजी और आनंद दुबे को मिली नई राजनीतिक भूमिका का असर आने वाले समय में पार्टी की गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर उसकी स्वीकार्यता के संदर्भ में देखा जा सकेगा।
