महाराष्ट्र ( मुंबई ) – नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पौत्र (आजाद हिंद फ्रंट ) श्री चंद्र कुमार बोस ने सभी देशवासियों का आवाहन किया है कि वे नेता जी सुभाष चंद्र बोस के सपनों का भारत बनाने के लिए आगे आयें। वे आज यहां दादर में पर्यावरण दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में केवल सत्ता परिवर्तन हुआ है व्यवस्था परिवर्तन नहीं। हमें अब व्यवस्था परिवर्तन के लिए एकजुट होना है और नेता जी ने जिस तरह का देश बनाने का सपना देखा था उसे पूरा करने की दिशा में काम करना है। उन्होंने बाबूभाई भवानजी और राज साहेब महेता के सामाजिक कार्य की भूरि भूरि प्रशंसा की।
सभा में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि इस अमेरिका इजरायल और ईरान युद्ध के कारण तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है इसलिए प्रत्येक देशवासी को यह स्थिति समझनी चाहिए और सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाबू भाई भवानजी ने यह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करके सराहनीय कार्य किया है।
सभा में पर्यावरणविद श्री गिरीश राउत, बाबूभाई भवानजी, आरजू के संस्थापक राजसाहेब मेहता,आदि ने भी संबोधित किया।
आरजू सभागृह दादर (ईस्ट) विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में वर्तमान ऊर्जा संकट और ग्रीन एनर्जी विषय पर बोलते हुए बाबूभाई भवानजी ने कहा कि हरित ऊर्जा वह ऊर्जा है जो प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होती है और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाती है। इसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, और जैविक ऊर्जा शामिल हैं। हरित ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने से प्रदूषण कम होता है ,और पृथ्वी का संरक्षण होता है।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस के प्रपौत्र श्री चंद्रकुमार बोस ने कहा कि हरित ऊर्जा के उपयोग से वायु” प्रदूषण में कमी आती है,जिससे ग्लोबल वार्मिंग की समस्या कम होती है। यह प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मदद करता है और जैव विविधता को सुरक्षित रखता है। उन्हाने सभी राष्ट्र भक्त लोगों से वृक्ष लगाने की अपील की
इस सभा में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ( आठवले ) पार्टी के मुंबई अध्यक्ष सिद्धार्थ कसारे, सिनियर नेता सुभाष साळवी, महामंत्री प्रविण मोरे, जनार्दन जंगले,एडवोकेट सुरेन्द्र मिश्रा, इकबाल मेमन, श्रीमती चंद्रकला जंगले,अनिल महेता, सुनिल वरतरकर,चंद्रकांत गायकर, राजेंद्र पालव, लालजी कोरी आदि उपस्थित थे।
एडवोकेट सिनियर पत्रकार सुरेन्द्र मिश्रा ने संस्था का कार्य अहवाल दिया और आभार प्रकट किया।
जनार्दन जंगले ने स्वागत भाषण और कार्य की रूप रेखा प्रस्तुत की।
