शिक्षक हैं सर्वोच्च – योगीराज भारत भूषण भारतेंदु जी

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महाराष्ट्(पालघर)
शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर ब्रह्मर्षि योगीराज श्री भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज — संस्थापक श्री हरि नारायण सेवा संस्थान, पालघर (मुंबई, महाराष्ट्र), अखिल भारतीय जैन दिवाकर मंच, नई दिल्ली संत प्रकोष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं भाजपा आध्यात्मिक आघाड़ी योग प्रमुख, महाराष्ट्र प्रदेश — ने विश्व के लिए एक गहन और दूरदर्शी संदेश दिया।
आज के समय में, जब अमेरिका और भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देशों में जातिवाद और विभाजन की राजनीति को कुरेदा जा रहा है, यह प्रवृत्ति सभ्य और सशक्त समाज के लिए एक कोढ़ की तरह है।
शिक्षक दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं है, बल्कि मानवता, समानता और सद्भावना का संस्कार जगाना है।
योगीराज भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज ने कहा:
“जातिवाद और विभाजन मानव समाज की प्रगति के सबसे बड़े बाधक हैं। जैसे शरीर में कोढ़ पूरे तन को नष्ट कर देता है, वैसे ही जातिवाद समाज की आत्मा को खोखला कर देता है। हमें शिक्षा और संस्कार के माध्यम से ऐसे रोग को मिटाना होगा। शिक्षक का कार्य केवल पाठ पढ़ाना नहीं, बल्कि पीढ़ियों को मानवता का पाठ पढ़ाना भी है।”
विश्व के लिए आह्वान
जाति, रंग, वर्ण और संप्रदाय से ऊपर उठकर मानव धर्म को अपनाएं।
शिक्षा को समानता, एकता और शांति का सेतु बनाएं।
भारत पूरे विश्व में सांस्कृतिक बंधुत्व और सहयोग की भावना को लेकर आगे बढ़ रहा है।
गुरु-शिष्य परंपरा और वैश्विक शिक्षक मूल्यों को पुनर्जीवित करें।
इस शिक्षक दिवस पर, श्री हरि नारायण सेवा संस्थान और योगीराज भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज ने संपूर्ण विश्व से एक स्वर में आग्रह किया है—
“जातिवाद और रंग भेद को त्यागें, संस्कारों को अपनाएं और शिक्षा को शांति व मानवता का माध्यम बनाएं। यही विश्व कल्याण का मार्ग है।

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