महाराष्ट्र ( मुंबई, दादर ) – पूर्व उप महापौर बाबू भाई भवानजी के निर्दलीय मैदान में उतरने से दादर वेस्ट वार्ड नंबर 192 का चुनाव दिलचस्प हो गया है। भवानजी के मैदान में उतरने से दादर वेस्ट कबूतरखाना बंद कराने, जैन समाज के लोगों की नाराजगी का मुद्दा जोर पकड़ने लगा है। मराठी समुदाय के मतों में होने वाले संभावित बंटवारे की संभावना के बीच भवानजी की उम्मीदवारी ने महायुति उम्मीदवार की मुश्किलें और बढ़ा दी है।
मुंबई के पूर्व उपमहापौर और वरिष्ठ भाजपा नेता बाबू भाई भवानजी ने ने अपने समर्थकों के साथ 29 दिसंबर को वार्ड नंबर 192 से अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। भवानजी के समर्थकों का कहना है कि महायुति ने वार्ड नंबर 192 का टिकट किसी हिन्दू, जैन या सनातनी को न देकर दादर के मंदिर के बाहर मांस मटन काटकर आंदोलन करने वाले को टिकट दिया है जिसके विरोध में भवानजी को मैदान में उतारा गया है।
इन लोगों का कहना है कि कबूतर खाना बंद करने से पक्षी प्रेमी,अहिंसा प्रेमी पहले से ही सरकार से नाराज हैं।
भवानजी का कहना है कि वार्ड नंबर 192 से उनका रिश्ता 40 साल पुराना है। व्यवसाय और समाज कार्य इसी वार्ड में चलता है। मेरा घर परिवार यही रहता है। बता दें कि बाबुभाई भवानजी दादर विट्ठलवादी गणेश उत्सव मंडल , जैन हॉस्पिटल और वर्धमान जैन श्रावक संघ तथा दादर वेस्ट के सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
बाबुभाई भवानजी कच्छी गुजराती व्यवसायी वर्ग से ताल्लुक रखने वाले समाजसेवी हैं। इस वार्ड में कुल 50713 मतदाता हैं। जिसमें 54 प्रतिशत मराठी, गुजराती, जैन, मारवाड़ी 15 प्रतिशत, उत्तर भारतीय दस प्रतिशत, दक्षिण भारतीय तीन प्रतिशत, क्रिश्चियन दो प्रतिशत, पंजाबी दो प्रतिशत, मुस्लिम दो प्रतिशत तथा अन्य बारह प्रतिशत हैं।
इस वार्ड में महायुति, कांग्रेस और शिवसेना उबाठा तीनों उम्मीदवार मराठी हैं जिससे उनके बीच मराठी मतों का विभाजन तय है जिसके चलते बाबूभाई भवानजी की स्थिति काफी मजबूत है।
इस वार्ड में गुजराती, जैन, कटर हिंदू सनातनी,कच्छी और मारवाड़ी समाज का वोट निर्णायक होने वाला है। यहां भवानजी की मौजूदगी से सभी मराठी उम्मीदवारों का खेल खराब हो सकता है।बता दें कि मुंबई में कबूतरों को दाना डालने पर पाबंदी के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मुंबई के कबूतरखाना पर तिरपाल डालने को लेकर जैन समुदाय नाराज है। जैन मुनि ने कहा है कि वह धर्म के खिलाफ किसी की नहीं सुनेंगे।
मुंबई में कबूतरों को दाना डालने पर जब से रोक लगाई है तब से बीएमसी एक्शन में है। बीएमसी ने कबूतरों को दाना डालने पर अब तक अनेक लोगों पर जुर्माना लगाकर लाखों रुपये वसूले हैं। दाना खिलाने पर लगी रोक को लेकर याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं दी थी। इस सब के बीच जैन समाज पांबदी को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं है। इनता ही नहीं जैन मुनियो ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर शस्त्र भी उठाएंगे। उन्होंने कहा है कि धर्म के खिलाफ किसी की नहीं सुनेंगे।
जैन मुनियो ने कहा कि धर्म के खिलाफ जाएगी तो हम नहीं मानेंगे। इसके साथ-साथ ये चेतावनी भी दी है कि यदि जरूरत पड़ी तो हमारा शांतिप्रिय समाज हथियार भी उठाएगा। मुनि ने यह चेतावनी दी है। अभी तक कबूतर खाने को बंद करने तथा पक्षियों को दाना न डालने के आदेश को बरकरार रखा है।
अब हम शांत नहीं बैठेंगे। गुजराती, कच्छी ,जैन सनातनी और मारवाड़ी समाज की इस आक्रामकता के कारण इस वार्ड का चुनाव दिलचस्प हो गया है और बाबूभाई भवानजी इसी समाज की प्रेरणा से चुनाव में ताल ठोंक रहे हैं।

