वरिष्ठ साहित्यकार जटाशंकर प्रियदर्शी को साहित्यकार सत्कार आपके द्वार योजना में मिला साहित्य रत्न सम्मान.

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उत्तर प्रदेश ( प्रयागराज ) –  उत्कृष्ट साहित्य सर्जक की लेखनी से निसृत विचार शब्दों के रूप में जीवन के स्वर्णिम द्वार खोलने में सहायक होता है जो मनुष्य को उर्जावान बनाए रखता है । उपरोक्त उद्गार सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ शंभूनाथ त्रिपाठी अंशुल जी ने उस समय व्यक्त किए जब वह साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज द्वारा साहित्यकार सत्कार आपके द्वार योजना में रसूलाबाद संजय चौराहे के पास श्री प्रियदर्शी के आवास पर अध्यक्षीय उद्बोधन कर रहे थे। डॉ शंभूनाथ त्रिपाठी अंशुल ने कहा कि जटाशंकर प्रियदर्शी को आज साहित्य रत्न सम्मान से अलंकृत किया गया है जो अत्यंत सराहनीय है।

अपने स्वागत भाषण में डॉ राम लखन चौरसिया वागीश ने कहा कि श्री प्रियदर्शी जी को सम्मान मिलना साहित्य क्षेत्र में गौरव की बात है। शब्द और सृजनकार सदैव अमर रहते हैं वे कभी नहीं मरते इसीलिए केवल रचनाकार और ब्रह्म को सृजनकर्ता की संज्ञा दी गई है।

मौलिक विचार एवं साहित्यिक सर्जना की प्रतिनिधि पत्रिका साहित्यांजलि प्रभा द्वारा प्रवर्तित साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज इस माह का साहित्य रत्न सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार जटाशंकर प्रियदर्शी को प्रदान किया गया ।

साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज के व्यवस्थापक  डॉ ० भगवान प्रसाद उपाध्याय के संचालन में सम्पन्न इस आयोजन में पंडित राकेश मालवीय मुस्कान ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया और डॉ ० राम लखन चौरसिया वागीश के स्वागत के बाद रवीन्द्र कुशवाहा ने योजना पर विस्तार से जानकारी दी श्री कुशवाहा ने साहित्यांजलि प्रभा मासिक पत्रिका को संरक्षित संवर्धित करने की अपील की । इस अवसर पर जटाशंकर प्रियदर्शी ने अपनी कविताओं का सस्वर पाठ किया और योजना के दीर्घायु होने की कामना करते हुए कहा कि यह पूरे देश में अपनी तरह की अनूठी पहल है । उपस्थित सभी सम्मानित कवियों ने अपनी कविताओं से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया । अंत में आभार डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय ने व्यक्त किया।

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