राजस्थान ( जैसलमेर ) – मरुधरा की पावन धरती से उठी “ओरण संरक्षण” की संवेदनात्मक पुकार अब एक व्यापक सांस्कृतिक और पर्यावरणीय जनअभियान का स्वरूप ले रही है। जैसलमेर की ओरण भूमि के संरक्षण हेतु चल रहे प्रयासों को आध्यात्मिक-सामाजिक आयाम प्रदान करते हुए पालघर पीठाधीश्वर योगीराज भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज ने “मां मां मां – शांति से क्रांति” का आह्वान किया है।
इस मुहिम में श्री हरि नारायण सेवा संस्थान, मुंबई की ओर से आयुष पांडेय और गोविंद सिंह भाटी सक्रिय रूप से सहभागी बने हैं।
ओरण : मरुधरा की जीवनरेखा-
जैसलमेर की ओरण भूमि केवल चारागाह नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, आस्था और पर्यावरण का आधार है। यहाँ पशुधन को आश्रय मिलता है, पक्षियों को बसेरा और देवस्थलों को संरक्षण। अकाल के कठिन समय में यही भूमि जीवनदाता सिद्ध हुई है।
दिसंबर माह में “टीम ओरण जैसलमेर” द्वारा राज्य सरकार को प्रस्तुत विस्तृत ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि जैसलमेर कलेक्टरेट एवं बीकानेर उपनिवेशन कार्यालय में ओरण से जुड़े 45,50 प्रस्ताव वर्षों से लंबित हैं। यदि इन पर त्वरित कार्रवाई हो तो लगभग 3,4 लाख बीघा भूमि संरक्षित की जा सकती है।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि ओरण भूमि का विधिक दर्जीकरण शीघ्र हो।
जब तक दर्जीकरण पूर्ण न हो, किसी भी प्रकार का नया आवंटन न किया जाए। जिन गांवों रावला, सेऊआ, सोनू, सेरवा, रामगढ़ आदि की ओरण, गोचर, तालाब, खड़ीन, देवस्थल व आम रास्ते राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं, उन्हें मूल स्वरूप में संरक्षित किया जाए। सौर व पवन परियोजनाओं के बढ़ते विस्तार से वर्षा में कमी, तापमान वृद्धि व पर्यावरणीय असंतुलन को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है।
मां मां मां , शांति से क्रांति –
इस सामाजिक विषय को व्यापक मानवीय और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ते हुए योगीराज भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज ने कहा:
“यह किसी विरोध का स्वर नहीं, बल्कि संतुलित विकास के लिए शांति का आग्रह है। हमारी संस्कृति की जड़ में तीन महान शक्तियाँ हैं। धरती मां, गौ मां और अपनी मां। यदि इन तीनों का सम्मान सुरक्षित है, तो हमारा भविष्य सुरक्षित है।”
तीन माताओं का संकल्प –
धरती मां , प्रकृति संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण।
गौ मां ग्राम्य अर्थव्यवस्था, करुणा जीव दया और संस्कृति की रक्षा। अपनी मां मातृ सम्मान, नारी गरिमा और परिवार में संस्कारों की पुनर्स्थापना। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी दल, जाति या वर्ग का नहीं, बल्कि मानवता और संतुलित विकास का है। मुंबई स्थित श्री हरि नारायण सेवा संस्थान की ओर से आयुष पांडेय और गोविंद सिंह भाटी ने इस मुहिम में सहभागिता जताते हुए कहा कि ओरण संरक्षण केवल भूमि बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि संस्कृति, पर्यावरण और ग्रामीण अस्मिता की रक्षा का संकल्प है।
संस्थान ने प्रशासन और राज्य सरकार से विनम्र अपील की है कि:
लंबित प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय हो।
ऐतिहासिक धरोहरों का राजस्व रिकॉर्ड में विधिवत अंकन किया जाए और विकास परियोजनाओं में स्थानीय समाज की भागीदारी सुनिश्चित हो। यह पहल किसी टकराव का नहीं, बल्कि विश्वास का सेतु है। मरुभूमि की यह पुकार केवल जैसलमेर की नहीं, बल्कि समस्त भारत की सांस्कृतिक चेतना की आवाज है।
“मां मां मां , शांति से क्रांति” के इस मंत्र के साथ समाज, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे परंपरा, पर्यावरण और प्रगति के संतुलन को साधते हुए ओरण भूमि को स्थायी संरक्षण प्रदान करेंगे।

