वन्जारी समाज भूषण मारेंगे शतक – “योगीराज भारत भूषण”
शिक्षा, संस्कृति और सेवा के आदर्श प्रतीक श्री प्रदीप राव पिंपले जी को योगीराज भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज की शुभकामनाएं
पालघर, महाराष्ट्र —
श्रमप्रतिष्ठान के संस्थापक, शिक्षा महर्षि, ज्ञान तपस्वी, वन्जारी समाज भूषण और कृषिभूषण श्री प्रदीप राव पिंपले जी अपने जीवन के 97वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इस अवसर पर ब्रह्मर्षि योगीराज श्री भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज, संस्थापक श्री हरि नारायण सेवा संस्थान, पालघर–मुंबई, महाराष्ट्र एवं अखिल भारतीय जैन दिवाकर मंच (नई दिल्ली) के संत प्रकोष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा भाजपा आध्यात्मिक आघाड़ी योग प्रमुख महाराष्ट्र प्रदेश ने हार्दिक शुभकामनाएं अर्पित कीं।
योगीराज भारत ने कहा
“प्रदीप राव पिंपले जी शिक्षा, सेवा और साधना के त्रिवेणी संगम हैं। उन्होंने युवावस्था में सरकारी नौकरी त्यागकर समाजसेवा का मार्ग चुना और शून्य बजट में कार्य कर यह सिद्ध किया कि सच्चा तप वही है जो दूसरों के जीवन में प्रकाश भर दे।”
श्री पिंपले जी ने अपने जीवन को शिक्षा और ग्रामीण विकास को समर्पित किया। पालघर–बोईसर क्षेत्र में उन्होंने अनेक विद्यालयों की स्थापना कर शिक्षा जगत में नई कीर्तियां रचीं। साथ ही, उन्होंने किसानों के लिए योगीराज भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज के सहयोग से कई जनकल्याणकारी कृषि एवं स्वास्थ्य प्रकल्प प्रारंभ किए, जिनसे सैकड़ों परिवारों को आत्मनिर्भरता मिली।
आज भी वे अपने अनुशासन, योग और ध्यान की नियमित दिनचर्या से युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।
“गौ, गंगा, गांव और गुरुकुल की सेवा में जो निरंतर लगा है, वही भारत की आत्मा को जीवित रखता है।”
श्री हरि नारायण सेवा संस्थान के तत्वावधान में चल रहे राष्ट्रीय अभियान
“अपनी संस्कृति अपना संस्कार” तथा “हर हांथ बांसुरी हर सांस बांसुरी” में भी श्री पिंपले जी सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।
उनका यह जीवन-साधना और राष्ट्रसेवा का सफर वन्जारी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है।
‘सेवा ही साधना है, और साधना ही सच्चा जीवन।
वन्जारी समाज भूषण मारेंगे शतक “योगीराज भारत भूषण” शिक्षा, संस्कृति और सेवा के आदर्श प्रतीक श्री प्रदीप राव पिंपले जी को योगीराज भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज की शुभकामनाएं
