महाराष्ट्र ( नाशिक ) महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग धाम में समस्त अखाड़ों के प्रमुख संतों ने अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ कुशावर्त कुंड में पवित्र स्नान किया तथा तत्पश्चात भगवान त्र्यंबकेश्वर महादेव के दर्शन एवं जलाभिषेक के साथ रुद्राभिषेक सम्पन्न किया। इस दिव्य आयोजन में संतों का आशीर्वाद एवं मंगलकामनाएँ समस्त समाज को प्राप्त हुईं।
इस अवसर पर पालघर पीठ की ओर से लोककल्याण, सामाजिक समरसता, युवा जागरण तथा संस्कृति एवं संस्कार संरक्षण के उद्देश्य से विशेष पूजन एवं रुद्राभिषेक सम्पन्न किया गया।
पालघर पीठाधीश्वर ब्रह्मर्षि योगीराज श्री भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज ने समाज में शांति, सद्भाव एवं संस्कार आधारित जीवन मूल्यों के प्रसार का संकल्प दोहराते हुए कहा “जहाँ समाज में कभी भय और विघटन का वातावरण था, वहाँ अब सेवा, संस्कार और समरसता का प्रकाश फैलाना हमारा संकल्प है। पालघर पीठ समाज को जोड़ने, युवाओं को दिशा देने और संस्कृति को सशक्त बनाने का कार्य निरंतर आगे बढ़ाएगा।
उन्होंने आगे घोषणा की कि पालघर पीठ निकट भविष्य में नशामुक्ति, युवा मार्गदर्शन, संस्कार जागरण तथा सामाजिक समरसता से जुड़े राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम प्रारम्भ करेगा। इस अवसर पर योगीराज की बांसुरी की मधुर धुन से उपस्थित श्रद्धालु एवं संतगण मंत्रमुग्ध हो उठे।
श्री आदिनाथ अखाड़ा, श्री नवनाथ धाम त्र्यंबकेश्वर के महंत श्री विश्वनाथ जी महाराज ने पालघर पीठ से आए संतों एवं श्रद्धालुओं का स्वागत एवं सम्मान करते हुए विश्वकल्याण की कामना की तथा 12 अप्रैल को पालघर पीठ में आयोजित होने वाले कार्यक्रम की सफलता हेतु अग्रिम शुभकामनाएँ प्रदान कीं।
पीठ के गुरुकुल कुलपति श्री राममणि त्रिपाठी ने कहा कि जिस पालघर को कभी नकारात्मक प्रचार से जोड़ा गया, वहीं अब 12 अप्रैल से धर्म और संस्कृति की पवित्र गंगा प्रवाहित होगी।
पूजन कार्यक्रम पूर्ण शांति, अनुशासन एवं मर्यादा के साथ सम्पन्न हुआ तथा समस्त समाज की सुख-शांति और राष्ट्र कल्याण की कामना की गई।

